इश्क़ ने महफ़िल सजाया जिसका,
दिल टूटने से वो इश्क़ न रहा खुद का।
दारू से बदनाम हुआ देवदास का प्यार,
बोलते हैं इश्क़ ने किया उसी का सत्यानाश।
अब दिल तो है दिल से दिल लगाने का,
सुकून न मिला झूठे प्यार का।
जीते हैं हर रोज़, शाम से लेकर सुबह,
याद तो आता है, मान के खुदा की दुआ।
बेवफ़ाई की दुनिया है, बेवफ़ाई का हिसाब,
पैसे से चलता है इंसानियत का किताब।
हमारे पन्नों पे मिला धोखा प्यार का,
मजबूरी अब कुछ न रहा, सिवा खुदा का।
जो पालक है तेरी, ठंडक दी गयी/ क्या बताऊ, निंदो के साथ सुबह दिखा गयी .. 😎